डॉ. निधि एस. सभरवाल, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA) में नेशनल फ़ेलो हैं। इससे पहले, उन्होंने NIEPA, नई दिल्ली, भारत में सेंटर फ़ॉर पॉलिसी रिसर्च इन हायर एजुकेशन (CPRHE) में एसोसिएट प्रोफ़ेसर के तौर पर काम किया है। वह यूनिवर्सिटी ऑफ़ वारविक, यूनाइटेड किंगडम के डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन स्टडीज़ में ऑनरेरी एसोसिएट प्रोफ़ेसर के पद पर भी हैं।
डॉ. सभरवाल पहले CPRHE/NIEPA की इंचार्ज रह चुकी हैं और उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ दलित स्टडीज़ के डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया है। उन्हें 'सोसाइटी फ़ॉर रिसर्च इनटू हायर एजुकेशन' (SRHE) की ओर से हायर एजुकेशन रिसर्च के क्षेत्र में योगदान के लिए SRHE एकोलेड (एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार) मिला है।(https://srhe.ac.uk/accolade- winners/#1721742400841-ce1653a8-9061).
उन्होंने गरीबों, खासकर अनुसूचित जाति के समूहों के विकास से जुड़े मुद्दों पर बहुत ज़्यादा रिसर्च की है। उन्होंने मानव विकास के पैमानों पर अलग-अलग समूहों के बीच असमानता का अध्ययन किया है। इसमें उन्होंने बाज़ार और गैर-बाज़ार संस्थाओं में जाति और लिंग के आधार पर होने वाले नुकसान, उच्च शिक्षा संस्थानों में विविधता और समावेश, मिड-डे मील और आंगनवाड़ी कार्यक्रमों, और सामाजिक सुरक्षा व सकारात्मक कार्रवाई की नीतियों पर ध्यान दिया है। उन्होंने दूसरे देशों में अलग-थलग पड़े समूहों, जैसे जापान के बुराकुमिन, का भी अध्ययन किया है।
डॉ. सभरवाल की मौजूदा रिसर्च हायर एजुकेशन में एक्सेस (पहुंच), कॉलेज के लिए तैयारी, छात्रों की विविधता और समानता पर केंद्रित है। उन्हें हायर एजुकेशन में समानता के मुद्दे पर 'मिक्स्ड-मेथड्स अप्रोच' का इस्तेमाल करते हुए कई राज्यों और कई संस्थानों में रिसर्च स्टडीज़ करने का काफ़ी अनुभव है। डॉ. सभरवाल ने अपने रिसर्च के क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर बड़े पैमाने पर काम किया है और उनके लगभग 100 पब्लिकेशन हैं। इनमें किताबें, चैप्टर, पीयर-रिव्यू किए गए जर्नल आर्टिकल (जिनमें कई महत्वपूर्ण स्कोपस-इंडेक्स्ड पब्लिकेशन शामिल हैं) के साथ-साथ ट्रेनिंग मॉड्यूल और पॉलिसी ब्रीफ़ भी शामिल हैं।